ट्रेडिंग ऐप पर मुनाफा दिखा, निकासी नहीं हुई
हर निकासी अनुरोध पर नई फीस मांगी गई। पैसे भेजना बंद करते ही ग्रुप गायब हो गया।
- वापस मिली
- कुछ नहीं
- किसने बताया
- गुमनाम सूरत, गुजरात
यह कैसे हुआ
एक परिचित ने उन्हें WhatsApp ग्रुप में जोड़ा जहां एक 'रिसर्च टीम' रोज शेयर की सलाह देती थी। दो हफ्ते सलाह सही निकली, क्योंकि वह बाजार चलने के बाद पोस्ट होती थी। सदस्य दिन भर मुनाफे के स्क्रीनशॉट भेजते रहते थे।
उनसे Play Store से नहीं, एक लिंक से ऐप इंस्टॉल कराया गया, ताकि 'संस्थागत आवंटन' मिल सके। नौ दिन में डैशबोर्ड पर ₹50,000 के ₹71,000 हो गए। ₹10,000 की छोटी निकासी हो भी गई, जिससे भरोसा पक्का हो गया।
₹6,40,000 लगाने और ₹9,10,000 दिखने पर निकासी के लिए 20% 'सेटलमेंट टैक्स' पहले मांगा गया। उन्होंने मना किया। एक दिन में ग्रुप हटा दिया गया और ऐप खुलना बंद हो गया।
कदम-दर-कदम
Yes
यह घटना एक पाठक ने भेजी है और हमारी मॉडरेशन टीम ने इसकी समीक्षा की है। नाम, नंबर और पहचान वाली जानकारी हटा दी गई है। यह केवल जागरूकता के लिए है, कोई कानूनी दस्तावेज नहीं।
इससे क्या सीख मिलती है
- डैशबोर्ड पर दिखता मुनाफा स्टेटमेंट नहीं है। जांचें कि संस्था SEBI में पंजीकृत है या नहीं।
- पहली छोटी सफल निकासी ठग का सोचा-समझा खर्च होती है।
- कोई ब्रोकर मुनाफे पर टैक्स पहले से नहीं वसूलता।