नकली CBI अधिकारी के साथ चार घंटे वीडियो कॉल पर
एक सेवानिवृत्त शिक्षिका को बताया गया कि उनके नाम के पार्सल में प्रतिबंधित सामान है। उन्हें कैमरे पर रोके रखा गया।
- वापस मिली
- ₹1,20,000 फ्रीज़
- किसने बताया
- गुमनाम पुणे, महाराष्ट्र
यह कैसे हुआ
कॉल एक ऐसे नंबर से आई जो लैंडलाइन जैसा दिखता था। कहा गया कि उनके नाम से ताइवान भेजा गया कूरियर मुंबई एयरपोर्ट पर खोला गया, जिसमें पासपोर्ट और प्रतिबंधित दवाएं थीं। कॉल करने वाले को उनका पूरा नाम और एक पुराने आधार-लिंक नंबर के आखिरी चार अंक पता थे, इसीलिए वे लाइन पर बनी रहीं।
दस मिनट में उन्हें वीडियो कॉल पर ले लिया गया। पीछे दीवार पर पुलिस का प्रतीक चिन्ह दिख रहा था। बताया गया कि मामला सुप्रीम कोर्ट में है, उनका नाम गिरफ्तारी सूची में है, और परिवार को बताने पर वे सह-आरोपी मानी जाएंगी। चार घंटे उन्हें कैमरे से हटने नहीं दिया गया।
मांग भुगतान के नाम पर नहीं, 'सत्यापन' के नाम पर रखी गई। कहा गया कि बचत RBI के खाते में जांच के लिए भेजें, दो घंटे में वापस आ जाएगी। उन्होंने दो बार पैसे भेजे। बेटी घर आई, स्क्रीन देखी और कॉल काट दी।
कदम-दर-कदम
Yes
यह घटना एक पाठक ने भेजी है और हमारी मॉडरेशन टीम ने इसकी समीक्षा की है। नाम, नंबर और पहचान वाली जानकारी हटा दी गई है। यह केवल जागरूकता के लिए है, कोई कानूनी दस्तावेज नहीं।
इससे क्या सीख मिलती है
- कोई पुलिस अधिकारी, CBI या अदालत वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी, पूछताछ या सत्यापन नहीं करती।
- अलग-थलग करना ही उनका तरीका है। 'किसी को मत बताना' इसलिए कहा जाता है क्योंकि परिवार कॉल बंद करा देगा।
- कोई सरकारी संस्था सत्यापन के लिए आपका पैसा नहीं रखती। ऐसा कोई खाता होता ही नहीं।